राजधानी दिल्ली में धर्म परिवर्तन का मामला अभी तक शांत नही हुवा कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी हज़ारों लोगो को हिंदू धर्म छोड़ बौद्ध धर्म की दीक्षा दिलाई गई,दर असल लखनऊ के शान्ति उपवन में आयोजित एक कार्यक्रम में हज़ारो लोगो ने शिरकत की,इस दौरान वहां मौजूद सभी लोगों ने बाबा साहब डाक्टर भीमराव अम्बेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं ली और नारे लगाये कि वो आज से ब्रम्हा विष्णू और महेश को भगवान नही इश्वर नही मानेंगे।

गौर तलब रहे कि कार्यक्रम को सुमित रत्न भंते ने आयोजित किया था, इसी कार्यक्रम में दलित समाज से सैकड़ों लोग आए और स्मृति उपवन में इकट्ठा हुए, बड़े-बूढ़े ही नहीं बल्कि कार्यक्रम में कई बच्चे भी शामिल दिखे, इस कार्यक्रम में ‘मैं ब्रह्मा विष्णु महेश को कभी ईश्वर नही मानूंगा, हिंदू देवताओं पर विश्वास नहीं करूंगा, ब्रह्माण के हाथों कोई क्रियाकर्म नहीं करवाऊंगा’ जैसे शपथ लोगों को दिलाए गए, आप को बता दें कि 14 अक्टूबर 1956 को जब बाबा साहेब हिन्दू धर्म त्यागकर बौद्ध धर्म में शामिल हुए थे तब उन्होंने ये प्रतिज्ञा स्वयं ली थी और अपने समर्थकों को भी दिलवाई थी।

इससे पहले 5 अक्टूबर को दिल्ली में बौद्ध धर्म का ऐसा ही एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, यहाँ इस कार्यक्रम में हजारों लोग उपस्थित थे और उन्हें बौद्ध धर्म की दीक्षा दिलाई गई थी और ऐसी ही प्रतिज्ञाएं दिलाई गई थी,और उस दौरान वहां हुए कार्यक्रम में दिल्ली गवर्नमेंट के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम उपस्थित थे, हालाँकि बाद में ये टकराव इतना बढ़ा कि पहले तो उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी बाद में रविवार को उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया था।

लेकिन इस बीच बड़ा सवाल ये है कि नेशनल मीडिया में इस खबर को महत्व देती दिखाई नही दे रही है,जबकि एक एक दिन में हज़ारों लोग हिंदू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म अपना रहे है,ज्ञात रहे कि संविधान हर किसी को अपनी पसंद का धर्म चुनने का अधिकार देता है लेकिन फिर भी 2014 के बाद से मुस्लिम धर्म अपनाने वालो को न सिर्फ शासन प्रशासन से बल्कि हिंदू संगठनो की तरफ से वि,रोध का सामना करना पड़ रहा है।

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