हि’न्दू-मु’स्लिम एकता की मिसाल, एक ही पंडाल में मनाया जायेगा मुहर्रम और गणेश पूजा..

August 28, 2020 by No Comments

देश में करो ना वायरस महामारी के चलते इस बात का भी त्योहारों का रंग फीका ही रह गया है। गौरतलब है कि इस महीने के अंत में गणेश चतुर्थी का त्यौहार आने वाला है जो कि हर साल देश में धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन कोरोना की वजह से यह त्योहार भी प्रभावित हुआ है। पिछले कई सालों से गणेश चतुर्थी और मु’ह’र्रम आसपास ही पड़ते हैं और कर्नाटक में हिं’दू-मु’स्लि’म एकता की मिसाल पेश करते हुए दोनों स’मुदा’यों के लोग एक ही छत के नीचे साथ आते हैं।

कर्नाटक के धारवाड़ जिले स्थित हुबली के बिदनाल इलाके के लोग गणेश चतुर्थी और मु’हर्र’म एक साथ मनाते हैं। दोनों समुदायों के लोग एक ही पं’डाल के नीचे हिं’दू-मु’स्लि’म एकता की मिसाल पेश करते हैं। पंडा’ल के एक ओर जहां गणपति महाराज विराजमान होते हैं तो वहीं दूसरी ओर मु’स्लि’म मुह’र्रम की प्रथाओं को पूरा करते हैं।

इस मामले में मौलाना जाकिर काजी ने बताया है कि 33 साल से गणेश चतुर्थी और मु’हर्र’म लगभग एक साथ ही आते हैं। इस गाँव में कोई भी सिर्फ हिं’दू या मु’सल’मान नहीं है। दोनों समुदाय एक साथ आते हैं। हम सभी भगवान के बच्चे हैं। गौरतलब है कि आजकल के माहौल में जहां हिं’दू मु’स्लि’म को बांटने की कोशिश की जाती रहती है। वही इस गांव के लोगों ने एक बहुत बड़ी मि’साल पेश की है जिससे कि दुनिया भर के लोगों में धा’र्मि’क एकता का संदेश जाता है।

एक श्रद्धालु मोहन ने समाचार एजेंसी एएनआइ से बात करते हुए कहा कि यहां पहले भी इसी तरह एक ही पंडाल के नीच ग’णेश चतु’र्थी और मु’हर्र’म का आयोजन किया गया है। हम उसी परंपरा को आगे लेकर चल रहे हैं। वहीं, मौ’लाना जाकिर काजी ने कहा कि हर 30-35 सालों में ग’णे’श चतुर्थी और मु’ह’र्रम की तिथियां टकराती हैं। इस गांव में कोई भी हिं’दू या मुस’लमा’न अकेला नहीं है, दोनों एक साथ आते हैं।

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