लॉक डाउन में इस हि’न्दू दंपति के लिए मसीहा बना ये मु’स्लि’म शख्स, एक महीने से कर रहा..

April 25, 2020 by No Comments

देश में को’रो’ना महा सं’क’ट की वजह से चल रहे लॉक डा’उन के दौरान आम लोगों को कई परे’शा’नियों का सा’म’ना करना पड़ रहा है। लॉक डाउन के कारण कई लोग अपने घर नहीं जा पा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला असम के मुर्शीबाद जिले से सामने आया है जहां एक हिं’दू दं’प’ति एक मु’सलमा’न के घर में रह रहा है।

असम के ग्वालपाड़ा के रहने वाले मिथुन दास इलाज के लिए अपनी पत्नी मौमिता के साथ कोलकाता जा रहे थे लेकिन अचानक लॉक डाउन का ऐलान कर दिया गया। जिसके चलते रहे लोग रास्ते में ही फं’स गए। इस मु’सी’बत के दौरान बेलडांगा इलाक़े के फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने उनको अपने घर में शरण दी।

आपको बता दें कि यह पूरा इलाका अ’ल्पसं’ख्य’कों का है और लॉक डाउन के दौरान यह हिं’दू दंप’ति 1 महीने से यही पर रह रहे हैं। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद वीडियो और स्था’नीय थाने के उसी ने गांव जाकर उनको खाने पीने की चीजें भी मुहैया करवाई हैं। दरअसल असम में ग्वालपाड़ा ज़िले के रहने वाले मिथुन दास को दिल की बी’मा’री है।

इसी के इ’ला’ज के लिए बीते महीने वह अपनी पत्नी को साथ लेकर कोलकाता के लिए स’ड़क मार्ग से निकले थे। डॉक्टर के पास गए इससे हिं’दू दंपति का वापस अपने घर आना मु’श्कि’ल हो गया क्योंकि इस दौरान लॉक डाउन का ऐलान हो चुका था। उनके पास इतने लंबे समय तक होटल में रहने के लिए पैसे भी नहीं थे और ना ही आस-पास कोई जानने वाला रहता था।

उसके बाद असम के अपने गांव के किसी परिचित के जरिए उनको इलाक़े के एक युवक का पता चला। यह दोनों लोग उसी सहारे बेलडांगा के मिर्ज़ापुर मौल्लापाड़ा गांव में पहुंचे। वहां फ़ारूक़ अब्दुल्लाह नामक वह युवक उन दोनों को सहर्ष अपने घर श’रण देने के लिए तैयार हो गया। उसने महीने भर से उनके आ’ति’थ्य में कोई क’स’र नहीं रख छोड़ी है। उसने खा’ने-पी’ने का इं’तज़ा’म तो किया ही है, मौमिता के बीमार पति के लिए ज़रूरी दवाएं भी खरीद दी हैं।

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