शरद पवार के इस दाँव ने सोनिया गांधी को भी चौं’काया, CM पद को लेकर 50-50 फ़ॉर्मूला तय..

November 14, 2019 by No Comments

मुंबई: महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना का 30 साल पुराना गठबंधन टू’ट गया है और अब नई सरकार नए गठबंधन के साथ शिवसेना जल्द ही बना सकती है. हालाँकि राज्य में राष्ट्रपति शासन लग चुका है लेकिन किसी गठबंधन के पास यदि बहुमत होगा तो सरकार बनाने का निमंत्रण राज्यपाल दे सकते हैं. इस बीच ख़बर है कि शिवसेना और एनसीपी-कांग्रेस में 50-50 फ़ॉर्मूला के तहत सहमति लगभग बन गई है.

इस फ़ॉर्मूला के तहत शिवसेना और एनसीपी दोनों का ही मुख्यमंत्री ढाई-ढाई साल तक रहेगा और पहली बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर शिवसेना को प्राप्त होगा. कांग्रेस पार्टी भी सरकार में शामिल होगी. असल में एनसीपी चाहती थी कि कांग्रेस और एनसीपी बजाय अकेले फ़ैसला लेने के एक साथ मिलकर फ़ैसला लें. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार का मानना था कि शिवसेना से कांग्रेस-एनसीपी ये कह कर बात करें कि उनके पास 98 विधायक हैं.

एनसीपी बार बार ये बात कह भी रही थी कि वो अपने सहयोगी के बिना कोई फ़ैसला नहीं लेगी. मंत्री पद का बँटवारा तीनों दलों के बीच बराबर होगा और अहम् मंत्रालय कांग्रेस के हिस्से में आ सकते हैं क्यूँकि उसका मुख्यमंत्री नहीं होगा. कांग्रेस की नेशनल लीडरशिप मोल-भाव करने में इंटरेस्ट नहीं ले रही है और उसका मक़सद है कि भाजपा महाराष्ट्र में कमज़ोर हो. इस वजह से कांग्रेस शिवसेना को समर्थन देने के लिए तैयार है.

शरद पवार साबित हुए चाणक्य
महाराष्ट्र के पूरे खेल में शरद पवार चाणक्य साबित हुए हैं. उन्होंने विरोधी ख़ेमे की चालों को समझते हुए काम किया. पवार को जब इस बात का यक़ीन हो गया कि शिवसेना अब भाजपा से अलग होना चाहती है तब उन्होंने शिवसेना से बातचीत शुरू की. मीडिया में इस तरह की ख़बरें आ रहीं थीं कि कांग्रेस की तरफ़ से देरी हो रही है लेकिन ये देरी शरद पवार की वजह से थी.

उन्होंने कांग्रेस से कहा कि गठबंधन के बारे में एनसीपी ने अंतिम फ़ैसला नहीं लिया है. इस बात को सुनकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चौं’क गईं क्यूँकि उनके सलाहकारों ने उन्हें बताया था कि एनसीपी गठबंधन को तैयार है. असल में पवार चाहते थे कि शिवसेना से अच्छे से बारगेन किया जाए. वो नहीं चाहते थे कि सबको लगे कि एनसीपी-कांग्रेस तो समर्थन देने को तैयार ही बैठे थे.