कुली हूं, मेहनत का खाती हूं… 45 मर्दों के बीच अकेली कुली है ये महिला..

January 13, 2021 by No Comments

रेलवे स्टेशन का नजारा आपने देखा ही होगा। यात्रियों की भी’ड़ और लाल कपड़ों में घूमते कुली। यात्रियों का सामान धोते हुए कुलियों की पूरी जिंदगी बीत जाती है। लेकिन क्या आपने कभी किसी महिला को ली को देखा है। आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसी महिला कुली की जो अपने परिवार को पालने पहुंचने के लिए यात्रियों का बोझ ढो रही है।

इस महिला कॉलेज का नाम है संध्या जिसकी उम्र 31 वर्ष है। संध्या का कहना है कि भले ही मेरे सपने टूटे हैं। लेकिन मेरे हौसले अभी भी जिंदा है जिंदगी ने मुझसे मेरा सब कुछ छीन लिया है। लेकिन अब बच्चों को पढ़ा लिखा कर मैं फौज में अक्सर बनाना चाहती हूं। इसके लिए मैं किसी के आगे हाथ नहीं फैलाउंगी। मैं कुली हूं और इस काम को करके इज्जत की रोटी कमाती हूं।

रेलवे कुली का लाइसेंस अपने नाम करवाने के बाद संध्या को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने साहस और मेहनत के साथ हर परेशानी का सामना किया जब वह वजन लेकर प्लेटफार्म पर चलती थी। तो लोग हैरत में पड़ जाते थे और उसके साथ ही उसके जज्बे को सलाम करने को मजबूर भी होते थे।

कटनी जंक्शन पर कुली का काम करने वाली संध्या साल 2017 से इस पेशे में है। संध्या इसके पीछे की मजबूरी में बताती हैं कि मैं अपने पति के साथ यही कटनी में रहती थी मेरे पति लंबे समय से बीमार चल रहे थे। 22 अक्टूबर 2016 को उन्होंने अंतिम सांस ली हमारे तीन बच्चे हैं। बीमा’री के बावजूद वह मजदूरी कर घर का खर्चा चलाते थे। उनके बाद मेरे और मेरे साथ पर तीन बच्चों की जिम्मेदारी आ गई है। ऐसे में जो नौकरी मुझे मिली मैंने वही कर ली।

संध्या बताती हैं, “मैं नौकरी की तलाश में थी। किसी ने मुझे बताया कि कटनी रेलवे स्टेशन पर कुली की जरूरत है। मैंने तुरंत अप्लाई कर दिया।””मैं यहां 45 पुरुष कुलियों के साथ काम करती हूं। पिछले साल ही मुझे बिल्ला नंबर 36 मिला है।”संध्या जबलपुर में रहती हैं।

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