आज कल के दौर में जबकि लोग अंग्रेज़ी को लेकर ज़्यादा फोकस हैं और अपने बच्चों को भी अंग्रेज़ी भाषा ही सिखाना चाहते हैं, ऐसे समय में हिंदी और उर्दू के लिए काम करना कितना ज़रूरी है ये वो सभी लोग समझते हैं जिन्हें भाषा से लगाव है. इसी सोच को ध्यान में रखते हुए साहित्य दुनिया काम कर रहा है. ‘साहित्य दुनिया’ ने आज के आधुनिक दौर की ज़रूरतों को समझते हुए सोशल मीडिया और वेबसाइट के ज़रिए अपना काम शुरू किया लेकिन जल्द ही ज़मीन पर भी काम होने लगा.

साहित्य दुनिया की शुरुआत नेहा शर्मा और अरग़वान रब्बही ने की है.समाचार वेबसाइट हेडलाइन 24 में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ अरग़वान और नेहा बताते हैं कि उन्हें शुरुआत में ये नहीं पता था कि साहित्य दुनिया को कितने लोग चाहेंगे लेकिन मन में एक ख़याल था कि अगर कोई न भी पसंद करे और न भी सीख पाए तो कम से कम वो दोनों कुछ न कुछ ज़रूर सीखेंगे। उन्होंने बताया कि साहित्य दुनिया के ज़रिए उन्होंने बहुत कुछ सीखा है और ये प्रक्रिया जारी है। जब-जब लोग उनसे भाषा से जुड़ा कोई सवाल करते हैं तो वो उससे कुछ न कुछ सीखते हैं। वहीं दोनों का ये कहना है कि उर्दू और हिंदी बहनों की तरह हैं दोनों साथ रहेंगी तो भाषा का विस्तार ही होगा।

पिछले दिनों साहित्य दुनिया ने मुंबई शहर के अलग-अलग हिस्सों में वर्कशॉप्स की हैं. हिन्दी और उर्दू की बुनियादी बातें समझने के लिए वौइस् अकादमी, थिएटर ग्रुप, स्कूल से लेकर लाइब्रेरी तक साहित्य दुनिया ने वर्कशॉप्स की हैं. इस बारे में नेहा कहती हैं कि हम छोटे बच्चों के लिए विशेष वर्कशॉप्स रखना चाहते हैं लेकिन अभी इम्तिहान का वक़्त है और बच्चे अभी उसमें व्यस्त हैं, उसके बाद हम कोशिश करेंगे कि स्कूलों में जाएँ और बच्चों से बातें करें.

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