आखिरी न’बी की इस भू’ख का वाकया, जिससे साबित होता है कि सभी मु’स्लि’म एक बराबर हैं

January 4, 2020 by No Comments

सारी दुनिया को पता है कि खु’दा ने आखिरी न’बी को सारी दुनिया के लिए रहम तुल्लि’ल आले मिन बना कर भेजा। लेकिन आप का जीवन बेहद साद’गी से गुजरा और कई बार तो ऐसा होता कि महिनों भर आपके घर में चु’ल्हा नहीं जलता था। जिनके एक इशारे पर चांद दो टुकड़े हो गए। उन्होंने कभी उफ़ तक नहीं किया। ‌एक रिवायत है कि आपने तीन दिनों से कुछ नहीं खाया था। रात मे सोए हुए थे। अचा नक बहुत तेज भुख लगी। उन्होंने अपने पेट मुबारक को पलंग पर रगड़ने लगे।उन्होंने बताया कि ऐ आ’इशा अन्हा बहुत जोरों की भु’ख लगी है जिनके लिए दुनिया बनी, पुरा आस मान वा जमीन बनी। जिनकी कसमें खु’द अ’ल्ला’ह खाता है उन्होंने भुख की इस तरह शिद्दत देखी। ‌हुजुर अपने पेट में पत्थर बाईं लिया करते थे कि जिससे भुख ना लगे। ताकि अपने आने वाले उम्मतियों को बता सके। हुजुर पाक ऐसे हस्ती थे कि अगर वो चाहते तो खाना या दुनिया के ऐशो आराम की चीज मुहैया हो जाती। लेकिन आप ने गरीबी चुनी ताकि अपने आने वाले उम्मतियों शिका यत ना करें।

उन्हें पता था उनके कई उम्मती बेहद गरीब होगें ऐसे में वो अ’ल्ला’ह से शिका यत करेंगे। ताकि वो समझ सके कि खु’दा के नज़दीक अमीर वो है जिससे खु’दा राजी हो ना कि वो जो मालदार हो। ‌आप की ही तरह आप की बेटी हज़रत फातमा अन्हा का भी हाल था उनके घर भी कई कई दिन तक चुल्हा नहीं जलता था एक बार जब कई  दिनो तक चुल्हा नहीं जला तो फातमा रजि़’अ’ल्ला’हो आपके के घर तशरिफ लाई। हुज़ूर पाक  उन्हें हाथ पकड़ कर बैठाया और पुछा क्या हुआ।

हजरत फात’मा ने फ़रमाया या अब्बा हुजूर आप के घर खाने के लिए कुछ है। तो हुज़ूर ने फ़रमाया तुम्हें क्या चाहिए कि मैं तुम्हें पाचन बकरीयां दे दु या फिर पांच दुआ। हजरत फातमा ने पाचं दुआ लेकर वापस घर चली गई। ये थी हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहि वस’ल्लम वा उनकी बेटी फा’तमा रजि़’अ’ल्ला’हो अन्हा का सब्र।