बिहार के इस गाँव के म’स्जिद में होती है अनोखी अज़ा’न, गाँव में एक भी मुस्लिम..

August 31, 2020 by No Comments

देश में साम्प्र’दायिक’ता की बातें अक्सर देखने में आती हैं लेकिन अब भी कई ऐसी जगहें हैं जहाँ लोग हिंदू- मु’स्लिम एक’ता के रखवाले हैं। एक ऐसा ही उदाहरण है बिहार के नालंदा ज़िले के बेन प्रखं’ड के माड़ी गाँव का। इस गाँव में एक म’स्ज़िद है जिसमें दोनों वक़्त की अज़ा’न भी होती है और पाँचों वक़्त नमा’ज़ भी होती है।

अब आप सोच रहे होंगें कि आख़िर इसमें ख़ास क्या है तो हम आपको बता दें कि यहाँ होती है अनोखी अज़ा’न, जी हाँ यहाँ अज़ा’न के लिए लगाया जाता है पेनड्राइव। अब आपको पूरी बात बताएँ इस गाँव में एक भी मु’स्लिम परिवार नहीं है। पहले यहाँ कई मु’स्लिम परिवा’र रहा करते थे लेकिन धीरे-धीरे वो पला’यन करते गए और एक रोज़ ऐसी स्थि’ति आयी कि गाँव में एक भी मु’स्लिम परिवा’र नहीं बचा लेकिन पीछे रह गयी म’स्जिद।

गाँव में रहने वाले हिं’दू परिवा’रों ने इस म’स्जिद को उपेक्षि’त छो’ड़ना सही नहीं समझा। इसलिए उन्होंने ये बी’ड़ा उ’ठाया, यहाँ रोज़ नियम के अनुसार सुबह और शाम सफ़ाई होती है और दोनों वक़्त अज़ा’न भी दी जाती है जिसके लिए पेनड्राइव में रिकॉर्डेड अज़ा’न ब’जायी जाती है। यही नहीं यहाँ पाँचों वक़्त की नमा’ज़ भी होती है। इस म’स्जिद के सामने ही एक मज़ा’र भी है उसका रख रखाव भी अच्छी तरह किया जाता है।

यहाँ तक कि लोग इस पर चादर भी चढ़ाते हैं और गाँव में अगर कभी कुछ बु’रा हो जाए तो मज़ा’र में उसके ठीक हो जाने की दुआ भी माँगते हैं। इस म’स्जिद का निर्माण क’ब हुआ था ये तो कोई नहीं जा’नते लेकिन फिर भी इस म’स्जिद को 200-250 साल पुरा’नी बताया जाता है।
गाँव में कोई भी ख़ुशी का मौ’क़ा हो तो सबसे पहले गाँव के हिं’दू परिवार म’स्जिद में आते हैं।

हर त्योहार में इस म’स्जिद को भी रंग- रोगन करके चमकाया जाता है। माड़ी गाँव के हिं’दुओं ने जिस तरह से म’स्जिद का रख- रखाव किया है इससे देश में एकता और शांति का संदेश साफ़ जाता है इस म’स्जिद से अम’न और भा’ई’चारे की बयार बहती है।

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