एर्दोगान को क्यों कहा जा रहा मुस्लिम देशों का मसीहा, तुर्की के इस आ’क्रामक कदम ने…

January 8, 2021 by No Comments

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान बीते साल से ही चर्चा में बने हुए हैं। किसी ना किसी मुद्दे पर एर्दोगान अक्सर वि’वादों में भी आ जाते हैं। तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयप एर्दोगन को अपना ब’ड़बो’लापन भारी पड़ गया है। हाल ही में एर्दोगन ने अजरबैजान की राजधानी बाकू में ईरान के अजरी अल्पसंख्यकों को लेकर बयान दिया था।

राष्ट्रपति एर्दोगन हाल ही में नागोर्नो-काराबाख यु’द्ध में अजरबैजान की कथित जीत का जश्न मनाने के लिए बाकू पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने ईरान के अजरी अ’ल्पसंख्य’कों के बीच अ’लगाव’वाद को लेकर एक कविता पढ़ी थी। जो ईरान को नागवार गुजरा है। उसने इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल करार दिया है।

वहीँ एक तरफ जहां तुर्की की सेना सीरिया और अजरबैजान में सक्रिय रही और अपनी दूरदृष्टि को नई ऊंचाइयों पर ले गई। दूसरी तरफ राष्ट्रपति और दुकान ने देश की पस्त कोई अर्थव्यवस्था भरते अं’दरुनी वि’रोध और अमेरिकी प्रति’बं’धों से जूझते हुए साल 2020 में करुणा महामारी के साथ बैठकर मुकाबला किया। तुर्की को भले ही साल 2020 में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब और दुकान की दुनिया भर में जमकर तारीफ कोई राशि पर उनकी गिरफ्त पहले जैसी इस साल भी मजबूत रही।

इस मामले में कैलिफोर्निया में सैनडिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी में तुर्की मूल के प्रोफेसर अहमत कुरु ने कहा है कि एर्दोगान शासन विपक्ष को, विशेष रूप से कुर्द और मीडिया को पूरी तरह से दबाए रखने के अपने लक्ष्य में इस साल भी कामयाब रहा है। आपको बता दें कि ये शासन तुर्की के बौ’द्धिक जीवन को न प’नपने देने में कामयाब रहा है, जिससे लगातार ‘ब्रे’न ड्रे’न’ हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, 2020 में राष्ट्रपति अर्दोआन के तहत तुर्की ने ख़’तरना’क ह’द तक एक आ’क्राम’क विदेश नीति अपनाई, जिसके कारण उनका देश अंत’रराष्ट्रीय’ स्तर पर काफ़ी ह’द तक अकेला पड़ गया।

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