बिहार में किंगमेकर बन सकती है बसपा और ओवैसी की पार्टी, एनडीए को मात देकर किया..

November 11, 2020 by No Comments

बिहार में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे कल घोषित किए जा चुके हैं। सीमांचल में ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने चुनाव जीतने में बाजी मार ली है। माना जा रहा है कि अगर सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी फैक्टर नहीं चलता तो शायद बिहार के सिंहासन पर बैठने का मौका तेजस्वी यादव को मिल सकता था। दरअसल असद्दुद्दीन ओवैसी की पार्टी उन्ही सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हुई है। जहाँ कांग्रेस और राजद का कब्जा है।

गौरतलब है कि बिहार चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। एनडीए राज्य में सबसे बड़े दल के तौर पर उभरा है। भाजपा, जदयू, हम और वीआईपी जैसी पार्टियों के गठबंधन से बने इस दल ने महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियां) को हरा दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि अगर कोई भी गठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर पाता है तो फिर असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम, बहुजन समाज पार्टी और अन्य निर्दलीय नेताओं की भूमिका काफी मायने रखेगी।

औवेसी की पार्टी एक सीट पर जीत दर्ज कर चुकी है और चार सीटों पर आगे चल रही है, जबकि बसपा एक सीट पर आगे चल रही है. इसके अलावा दो निर्दलीय भी उम्मीदवार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बिहार के सीमांचल इलाके में 24 सीटे हैं, जहां ज्यादातर सीटों पर मुस्लिम निर्णायक भूमिका में हैं। यहां के मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस, आरजेडी और जेडीयू के बजाय असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को चुना है।

AIMIM को बिहार की पांच सीटों पर जीत मिली है, जिनमें अमौर, कोचाधाम, जोकीहाट, बायसी और बहादुरगंज सीट है. ये सभी सीटें सीमांचल के इलाके की हैं। बिहार में AIMIM ने 20 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें से 14 सीटें सीमांचल के इलाके की थीं जबकि बाकी सीटें मिथिलांचल की थीं। सीमांचल में एनडीए की बात करें तो उसे किशनगंज में एक भी सीट नहीं मिली है जबकि पूर्णिया, अररिया और कटिहार में क्रमश: चार-चार सीटों पर जीत हासिल की है। महागठबंधन को किशनगंज में 2, पूर्णिया में एक, अररिया में एक और कटिहार में तीन सीटों से ही संतोष करना पड़ा है।

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