वह महान स्वतंत्रता से,नानी जिसने फां,सी के फंदे पर खड़े होकर अंग्रेज़ो को ल,लका,रते हुवे कहा था कि तुम मुझे जल्द से जल्द फां,सी दे दो क्युंकि मेरी मौत से एक ऐसा ज्वालामुखी फ़,टे,गा जो ब्रिटिश साम्राज्य को ज,ला कर रा,ख कर देगा,और मेरे खू,न का एक एक कतरा मुझ जैसे कई शेर अली खान को जन्म देगा।

शेर अली खान का जन्म 1842 ई पेशावर मे हुवा था 1857 की क्रां,ति नाकामयाब होने के बाद अंग्रेज़ पाग,लों की तरह हर उस इलाके मे क,त्ल व गार,त का बाज़ार गर्म किया जहाँ मुसलमानो की वजह से अंग्रेज़ो को भारी नु,कसान उठाना पड़ा था,सी,आइ,डी की खबर पर अंग्रेज़ो ने 1862 मे शेर अली खान को गि,रफ्तार किया 5 साल तक मु,क,दमा चला और 1867 मे फां,सी की स,ज़ा सुनाई गई,स,ज़ा का एलान होते ही आपके होंटो पर मुस्कुराहट देख जज ने फैसला बदल दिया और का,ला पा,नी की स,ज़ा सुनाई लेकिन गौर करने वाली बात यह है की आफरीदी का,ला पा,नी में मिल रही ज़िंदगी के बदले अंग्रेज़ो से मौ,त की स,ज़ा मांग रहे थे।

1869 का,ला पानी पहुंचने के बाद आप को पता चला कि अज़ी,माबाद और अम्बाला सा,ज़िश केस मे अंग्रेज़ चीफ जस्टिस जस्टिस नार्मन ने स,ख्त स,ज़ाओ का एलान किया है,जिस की वजह से गुस्से मे आये अब्दुल्लाह पंजाबी ने जस्टिस नार्मन का क,त्ल कर दिया और अब्दुल्लाह पंजाबी को अंग्रेज़ सरकार ने फां,सी की सज़ा दी है।

बस उसी वक़्त शेर अली खान ने यह तय कर लिया था कि वो अंग्रेज़ो के किसी बड़े अफसर को मा,र कर अब्दुल्लाह पंजाबी का बद,ला लेंगे,इसी बीच ब्रिटिश महारानी ने लार्ड म्यू को भारत का वायसराय बना कर भेजा लॉर्ड म्यू को आईपीसी के कानून लागू कराने और जे,लो के इन्तेजाम ठीक कराने की ज़िम्मेदारी दी गई थी इसलिये उसने पहले तो भारत के अलग अलग हिस्सो का निरक्षण किया और 1872 मे अण्डमान निकोबार पहुँचा,जहाँ पिछ्ले 3 सालों से उसकी मौ,त इंतज़ार कर रही थी।

लॉर्ड म्यू की सुर,क्षा के लिये अचूक इन्तेजाम किये गये थे लेकिन अचूक सुर,क्षा को भे,दते हुवे शेर अली आफरीदी ने 8 फरवरी 1872 की शाम अपनी खाई हुवी क,सम को पूरा कर दिया और पलक झप,कते ही शेर की तरह लॉर्ड म्यू पर हम,ला,वर हुवे और सी,ने मे 2 जगह वा,र किया जिसकी वजह से मौके पर वायसराय की मौ,त हो गई।

शेर अली खान को गिरफ्तार किया गया और उनपर 9 फरवरी को अण्डमान निकोबार के साहिल पर खड़े जहाज़ मे ही इस मु,क,दमे की सुनवाई हुवी महज़ एक दिन की ही सुनवाई मे आफरीदी को फां,सी की सज़ा सुनाई गई,अंग्रेज़ अफसरो को इस बात का भी शक था कि इतने बड़े अधिकारी को मा,र,ने की सा,ज़ि,श अकेले आफरीदी नही कर सकते लेकिन उनकी लाख कोशिशों के बावजूद आफरीदी ने किसी और का नाम नही लिया और आखिर मे 11 मार्च 1872 को शेर अली खान को फां,सी के फं,दे पर ल,ट,का दिया गया।

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